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Tuesday, September 18, 2012

एक नजर

एक नजर हमारी और भी देख लिया करो
कुछ हमारे बारे में भी कह दिया करो
हम तुम्हारे दीदार को खुदा की इबादत मानते
कभी तुम भी अपने खुदा से,
हमारे जैसी चाहत मांग लिए करो

गिर्राज.किशोर शर्मा
>>>>>गगन.>>>>>>>
 

मौत

मौत को कोन मात दे पाया हे 
कोन झील मै से मोती ला पाया हे
करना हो तो करो कोशिस एक मुस्कान की
दुःख के सिवा आजतक कोई दे क्या पाया हे

गिर्राज.

इकरार

लबो तक आते आते बात भूल जाता हु
तुमसे कुछ कहना हे ख्याल भूल जाता हु
सामने होता हु खुद को भूल जाता हु
करना हे इकरार कैसे करू में 
हर बार यंही आकर में रुक जाता हु
जिंदगी में तुम्हे न्योछावर कर जाता हु
हर बार यही बात सामने आकर भूल जाता हु.

गिर्राज..

अहसास

आज तक उनका अहसास मिटा नही हे
उनसे खास कुछ भी मिला नही हे
हमारे दिल का एक हिस्सा आज भी उनका हे
उस हिस्से को आज भी हमने छुआ नही हे 

गिर्राज..किशोर..शर्मा.
श्योपुर./...

शरारते

कुछ बाते आज भी छुपा रखी हे हमने
कुछ शरारते आज भी सजा रखी हे हमने
कभी आती हे आपकी याद हमें तो.
तो उन बातो का भी संसार सजा रखा हे हमने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर/

घड़ी घडी

घड़ी घडी आवे थारी याद मने, काई कउ तोसे मारा यार घने 
कामी तू सतावे मने यार सने, प्यार करू तोसे नरो बार हने 
एक बात कउ तोसे सुन ले रे, अस्यो न होवे जज्बात हने 
नजरो का तीर चलावे घने, थोड़ो मारा बारा में भी सोच जने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर.

वक्त

कुछ दोस्त कमीने निकले कुछ वक्त खराब था
मैं उन दिनों वरना सौ फीसदी कामयाब था 

कब सोचा था नागफनी मेरे आंगन में उगे 
मेरी सोच में बचपन से महकता गुलाब था 

हां साज़िसों के आगे बेबस थी मेरी तकदीर 
बेईमानों के झुण्ड में मैं अकेला जनाब था 

मेरे साथ यारों को हिस्से का आसमां मिले 
यही तो जुर्म था मेरा बस यही इक ख्वाब था

चलेगी साँस जब तलक ना भूलूंगा वो मंजर
मेरी बर्बादी का हर एक कदम लाजवाब था

नही मालूम क्यूं हो गया था सफर बनवास
मेरे पास मेरी मेहनत का पूरा हिसाब था

अब तू मिल गया है मुझे फिर बना लूँगा महल
पूछा तो खंडहरों का गगन यही जवाब था —





मोहब्बत

डूब जाता हु में तेरी याद में इस तरह 
घनघोर बादलो में छिपा हे पानी जिस तरह
मोहब्बत किसी कि गुलाम नही सिरफिरे 
वो आती केवल खुदा-ए-रहमत कि तरह

गिर्राज..शर्मा.गगन.

अँधेरा

दूर तक घना अँधेरा हे, जाने किधर सवेरा हे
कब तक चलता जाऊ में, कितना मुस्किल झमेला हे

आज में ठहर गया...

आज में ठहर गया...

कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया
कुछ बात सुनते सुनते आज में ठहर गया

मन में एक बात याद आई उसे सुन दहल गया
कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया

फिर किसी कि याद ने मुझे बड़ा उलझा दिया 
कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया 

वादा था कुछ दिन बाद मिलेंगे हम फिर 
उस बात को फिर सुन आज में ठहर गया 

रात बड़ी गंभीर हुई दिन फिर खामोश हुआ
पर उसकी बात में पूरे दिन उलझा रहा 

कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया 
कुछ बात सुनते सुनते आज में ठहर गया 

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन..
श्योपुर जिला श्योपुर
मो.9617226588

कल कल बहता जाये पानी

कल कल बहता जाये पानी

रोको इसको देगा जीवन, कल कल बहता जाये पानी
पछताओगे सहेजो इसको, कल कल बहता जाये पानी

प्रथ्वी का अस्तित्व बचेगा, रोको जनता वर्षा पानी 
फिर रोएगी जनता सारी, कल कल बहता जाये पानी.

पर्यावरण का घटता स्तर, कैसे फिर आयेगा पानी.
उठ जाओ वरना सो जाओगे, कल कल बहता जाये पानी.

कैसे कैसे खेल कैलता, देखो ये बहता पानी.
रोको इसको जल्दी रोको, कल कल बहता जाये पानी..

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन..
मो.9617226588

चलो कंही दूर चले

चलो कंही दूर चले 

दुनिया कि नजरो से हटकर चलो हम कंही दूर चले
इन गैरत लोगो से बचकर चलो हम कंही दूर चले 

मुफलिसी कि दुनिया में अब कोई अपना न रहा
जिससे कोई दर्द बांटे ऐसा कोई बंदा न रहा

कहते हे हमारी करते बड़ी परवाह ये 
पर आज क्यों हमारे खिलाफ हे ये

किसी को दोष देना अब ठीक नही लगता
चलो सनम हम अपने सपनो में चले

चलो कंही दूर चले, चलो कंही दूर चले

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन.
मो.9617226588
नजर न कर बन्दे मंजिल खुद ब खुद मिलेगी 
चलता जा अपने पथ पर, तुझे सदबूधि मिलेगी.
गिर्राज.गगन.

कवंर सा..सुणो तो सरी....

सभी का प्यार और आशीर्वाद चाहूँगा..

कवंर सा..सुणो तो सरी....
कतनी थांकी हारी भंरा, कुवंर सा..म्हाकी सुणो तो सरी 
दन बुड गयो अब तो, कुवंर सा.म्हाकी सुणो तो सरी

कतनी थांकी हारी भंरा, बात म्हालोगा की सुणो तो सरी
जान काड ली थाने म्हासब्डा की, पटेल सा म्हाकी सुणो तो सरी..

रतजगा में रात काट ली, कुवंर सा सुणो तो सरी
जिंदगी भर कि बात छांट ली, कुवंर सा सुणो तो सरी

बेटी म्हाकी थारे सागे, ध्यान राख जो उको तो 
प्यार पोटली थांके लारे, उने सागे राखो तो

कुटुंब कबीलों थान्को बड़ेलो, बात ध्यान में राखेजो,
अर प्यार सु थान्को घर म्ह्केलो, इने सागे धर्रो तो 

इब तो थाने म्हाकी सुण ली, कुछ पल्ले पड्ग्यो हो.
अब कोई बात कोनी न, बात थांकी कुवंर सा राख ली हो.

गिर्राज..किशोर.शर्मा.गगन..
श्योपुर, मो.9617226588

उदास


क्यों में उदास हूँ

सब कुछ है पास मेरे फिर में उदास हूँ
नही कोई तकलीफ, फिर भी परेसान हूँ

जिंदगी के रस्ते, कितने कठिन है
चल रहा हूँ फिर भी रस्ते उदास हे

शक हे न कोई गिला, फिर परेशान हूँ
कोन बताएगा मुझे क्यों में उदास हूँ

मौत का नही है खोफ, फिर क्यों घबरा रहा.
किस किस को बताऊ क्यों में उदास हूँ,

क्यों में उदास हूँ , क्यों में उदास हूँ.

गिर्राज.किशोर.शर्मा..,,**गगन.**

भूल भुलैया

जिंदगी बनी भूल भुलैया 
कैसे वो दिन कटे, कैसे कटी राते
जाने कैसे घर पहुचे, टकराते टकराते

रात चांदनी, सुहानी लगे, दिन लगे गंभीर, 
कैसे कैसे दिन कटे, ये बड़ा व्याधीर

मदहोश से रहने लगे अब तो हम भी यारो 
किस किस से छुपाये अपने गम को प्यारो

पीड़ा कुछ अपनी लगे, करे चेन सी बात
हो जाये कुछ बात तो फिर कैसे पहुचें अघात 

गिर्राज.किशोर शर्मा ,,**गगन.**

मासूमियत

खुदा ने तुझे जो मासूमियत अता की है 
तेरे नही मेरे अहसानों कि दुआ दी है

तू होश में रहना ए मेरे सनम 
तेरी जिंदगी को मेने अपनी जिंदगी दी है

कितना ही मुश्किल भरा हो सफ़र 
हर सफ़र में तेरा हमसफ़र बनूँगा 

गिर्राज.किशोर. शर्मा. गगन.

अलग थलग पड़ा हूँ मै

अलग थलग पड़ा हूँ मै

आज अलग थलग पड़ा हूँ में, जाने किससे तलब हो रहा हूँ में
किस बेचेनी ने घेर लिया, किन राहों पर अलख रहा हूँ में,

आज बहुत अलग थलग पड़ा हूँ में,

कोई अपना नजर नही आता, दूर तक राहें सुनसान है
कोन समझेगा मेरी पीड़ा, कैसे फर्श पर पड़ा हूँ में,

आज बहुत अलग थलग पड़ा हूँ में

भीड़ में भी तनहाइयो ने घेर लिया, ये कैसे मंजर में पड़ा हूँ में
किस किस से प्यार बांटू में, ये कितना गलत पड़ा हूँ में,

कितना अलग थलग पड़ा हूँ में,कितना अगल थलग पड़ा हूँ में,

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
गगन.

सफ़र

घर हुआ बड़ा मुश्किल , 
मुश्किल जिंदगी का सफ़र
किस राह जाऊं चुनना बड़ा मुश्किल,
हर एक को मेने दिया सहारा मुस्किलो में,
मेरी मुश्किलों में सब हो गये क्यों इतने बुस्दिल, 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.गगन.

Sunday, September 16, 2012


Zindgi

कसोटी, जिंदगी कि

मै जी रहा हूँ. पर क्या सही जी रहा हूँ, 
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ.

हर दिन एक नई परीक्षा, लेती ये जिंदगी
किस दिन पता चले, पास हुआ या फ़ैल 

बाजार मै होता है, कई मुश्किलों से सामना 
क्या पता कोन जाने, दुखो को निवारणा,

मै जी रहा हूँ पर क्या सही जी रहा हूँ,
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ,

गिर्राज,गगन/