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Tuesday, February 5, 2013

Nasha

नशा तेरी मोह्हबत का, चड़ा हे कुछ इस कदर 
की हर इक जर्रे में, मुझे आता हे तू नजर 

ज़माने भर की दुहाई मुझे लगती हे लगने दो 
मुझे केवल तेरी आस हे, तू मेरे आ पास इक पहर 

अब बहस नही करनी मुझे तुझसे इस मुद्दे पर 
तू चल साथ मेरे कुछ पहर कुछ पहर 

गिर्राज गगन

Thursday, January 3, 2013

मेरी रचनाये मेरी भावनाएं: पतझड़

मेरी रचनाये मेरी भावनाएं: पतझड़
dard bhara he seene me, gusse se man dhadhak rah, kya de tumko shrdhanjli ye man he pura sisak rah, aankh me ansu man me baicheni, kya kare kuch samjhe nhi, 

Bahin Damini Ke jalai jwala aaj desh ke seene me dahak rahi he ise anjam tak bhabakne do, or papiyo ko saja-e-mout tak jalne do,,

aaj samay he sankalp lo ki knhi bhi kabhi kisi bhi beti, bahin, mahila ya lachar par julm hota dikhta he to damdar awaj uthao or apradhi ko chodna mat chahe iske liye koi tumhare sath ho ya khilaf..niyati hamesha tumhare sath hogi..

Bharat Mata Ki jay..
Girraj**GaGan**
मत सुन उन बातो को, जिनसे तेरा मन घायल होता है 
नफरत का चाक़ू तेरे दिल के पार होता हे,

बस सुन उस वीणा को जिससे तेरे मन को तृप्ति मिले 
और घूम उस गली में, जिसमे सत्संग धाम मिले,

गिर्राज किशोर शर्मा **गगन**
Mo 9617226588

**आस**

**आस**

कब तक तेरी आस करूँ में, कब तक तुझको याद करूँ 
आधा जीवन गुजर गया,अब कैसे और इंतजार करू,

कैसे तुझको,याद करूँ।

सुबह से शाम हो जाती, तेरी आस ही खास हो जाती हे 
अब कितना में सब्र करूँ,कब तक तुझको याद करूँ,

कैसे तुझको याद करूँ ...

हर बात में तेरा ज़िक्र होता,मायूस मेरा मन हो जाता
तेरी भक्ति की शक्ति में दिन और रात गुजर जाता

कब तक तेरी आस करूँ में कब तक तुझको याद करूँ

गिर्राज किशोर शर्मा
मो। 9617226588
किस बात पे तुम फुल रहे, किस बात की तुममे हिम्मत हे 
ओकात तुम्हारी ज्यादा हे, इस बात की तुममे घिन्नत हे 
शर्म शर्म करो अब कुछ तो अच्छे कर्म करो,
ऐसे ही तुम करते रहे तो जिंदगी पे तुम्हारी ज़िल्लत हे
गिर्राज।गगन।

पतझड़

पतझड़ 

किस पेड़ की छाल लिखूं किस पेड़ की डाल लिखूं 
पूरा पतझड़ निपट गया, बिन फल कैसे बहार लिखूं 

जिन पेड़ो की छाया में अपना बचपन बिताया था 
कैसे इनको बेकार लिखूं में कैसे इनको बेकार लिखूं 

कितने झूलें खाए मेने, कितने सारे खाए आम 
अब खिलाफ कैसे उनके में अपने आरोप लिखूं 

प्यार करो इन पेड़ो से ये अपने जीवन आधार
बेहतर जीवन जी पाओगे,इनका सानिध्य है अपार

किस पेड़ की छाल लिखूं किस पेड़ की डाल लिखूं
पूरा पतझड़ निपट गया, बिन फल कैसे बहार लिखूं

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो।09617226588
श्री वृन्दावन सो वन नहीं, श्री नंदगाँव सो गाँव |
श्री बंसीवट सो वट नहीं, श्री कृष्ण नाम सो नाम ||

जय जय श्री कृष्णा ||

टक्कर अक्सर

किसी मोड़ पर हो जाती है टक्कर अक्सर
में भी रुक जाता हु वो भी रुक जाता है अक्सर 

बातो से कम इशारो से ही हो जाता हे बक्सर 
इसलिए कभी वो तो कभी में निकल जाता हूँ हंसकर 

किसी मोड .....

साथ में अगर हो कोई, तो बन जाता है दुष्कर 
बाद में अंतिम निर्णय करते हे, निकल चलो यंहा से बचकर 

किसी मोड़,....

एक दिन घटी छोटी दुर्घटना,
टेंशन में उसको आ गया चक्कर

मेरा भी हो गया ब्लड प्रेशर हाई
कैसे लाऊ इसको दिखाने डाक्टर

बड़ी मुश्किल से माना एक झोलाछाप
इलाज के लिए उसे ले आया बना डाक्टर

जैसे तैसे हो गई ठीक, जान में आ गई जान
छोड़ आ आया उसको में खा के 10 चक्कर

अब नही होती वो टक्कर, सोचता हूँ में ये अक्सर।।

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो,,096172265588

जब हम अकेले होते,

ऐतिहासिक सफ़र।।।।

जब भी हम अकेले होते, खुद के इतिहास को खोजते रहते 
कितने सारे सवालो से, खुद ही जूझ रहे होते

कितनी ही लड़ाईयां लड़ी थी हमने
उनको सोच रहे होते, जब भी हम अकेले होते 

वेसे तो हम राजा हे, दिल के और अपने घर के 
पर उसमे ही सफलता का दंभ भर रहे होते 

जब हम अकेले होते,

सफ़र में लोगे करते हे सम्मान से राम राम
पर अंदरूनी मन से करते हे बड़े ही बदनाम

सम्हल कर रहना होगा अब हमें,
इस बात का इख़्तियार करते हे

जब भी हम अकेले होते है, इन्ही बातो को खोजते हे
खुद के इतिहास को पढ़ते हे, जब भी अकेले होते हे,,

डर नही लगता मुझे गैरो से भरी इस दुनिया का
अपनों का भय मुझे हर घडी लगता हे ,

सांसो का कुछ कह नही सकते, साथ कब छोड़ जाये
इतिहास को और पुख्ता किये जाता हूँ, जब में अकेला होता हूँ

जब भी हम अकेले होते हें /////

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो 09617226588

*******विदा******

*******विदा******
विदा दे दो मुझे जिन्दगी से अब जीना मुहाल हे मेरा 
की अब परवाह करने वाला नही कोई, इस जन्हा में मेरा 

किस के लिए करू अब में खुशियों का जतन 
जिन्दगी का मकसद ही रुखसत हुआ मेरा 

जीना मुहाल हे मेरा,....

दुनिया कहती हे मुकद्दर की तासीर कर बन्दे,
में कहता हूँ लकीर ही ख़त्म हो गई मुकद्दर से मेरी,

और लोगो की चिंता मत कर लोगो का काम हे कहना
तू अपने इल्म से भी जिंदगी को खड़ा कर देगा

मिला हे मुझे अब मकसद जिन्दगी जीने का
की कोई तो घर बसने आ जाओ अब मेरा,

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो।09617226588

मेरी श्रधांजली

एक वीर योधा के लिए, मेरी श्रधांजली 

कविता ....

लौट के न वो आयेगा वो एक ऐसा योद्धा था
जिसने अपनी में ज़िन्दगी में हर कभी मानी नही

खून पसीने की नही की थी उसने चिंता 
पूरी जिंदगी ही हिंदुस्तान के लिए गुजार दी,

उसकी गर्जना में वो ताकत थी जिससे
दुश्मन भी थर थर कापने को लगते थे

देश के दुश्मनों था वो यमराज
ऐसा पूरी दुनिया में, नाम बोलता था

सेना को बनाकर, आत्मनिर्भर बनाया था
लोगो में उसने ऐसी जान भर ढाली थी।

लौट के न वो आयेगा वो एक ऐसा योद्धा था
जिसने अपनी में ज़िन्दगी में हर कभी मानी नही

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो,09617226588

Marghat...

jo kal apne hone ka gurur karta tha 
aaj apne astitva ko talash rha he
dunia ke liye puri zindgi gujar di jisne 
aaj khud ke liye thode samay ki bhikh mang rha he

Crt.By.>Girraj.Kishor.Sharma.


Manzil Yanhi thi, teri Umr Beet gai Aate Aate
Kya mila Tujhe is dunia, apno ne hi jala diya Jate Jate..


कसोटी, जिंदगी कि

कसोटी, जिंदगी कि

मै जी रहा हूँ. पर क्या सही जी रहा हूँ, 
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ.

हर दिन एक नई परीक्षा, लेती ये जिंदगी
किस दिन पता चले, पास हुआ या फ़ैल 

बाजार मै होता है, कई मुश्किलों से सामना 
क्या पता कोन जाने, दुखो को निवारणा,

मै जी रहा हूँ पर क्या सही जी रहा हूँ,
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ,

गिर्राज,गगन/

भूल भुलैया

जिंदगी बनी भूल भुलैया 

कैसे वो दिन कटे, कैसे कटी राते
जाने कैसे घर पहुचे, टकराते टकराते

रात चांदनी, सुहानी लगे, दिन लगे गंभीर, 
कैसे कैसे दिन कटे, ये बड़ा व्याधीर

मदहोश से रहने लगे अब तो हम भी यारो 
किस किस से छुपाये अपने गम को प्यारो

पीड़ा कुछ अपनी लगे, करे चेन सी बात
हो जाये कुछ बात तो फिर कैसे अघात

गिर्राज.गगन.