**आस**
कब तक तेरी आस करूँ में, कब तक तुझको याद करूँ
आधा जीवन गुजर गया,अब कैसे और इंतजार करू,
कैसे तुझको,याद करूँ।
सुबह से शाम हो जाती, तेरी आस ही खास हो जाती हे
अब कितना में सब्र करूँ,कब तक तुझको याद करूँ,
कैसे तुझको याद करूँ ...
हर बात में तेरा ज़िक्र होता,मायूस मेरा मन हो जाता
तेरी भक्ति की शक्ति में दिन और रात गुजर जाता
कब तक तेरी आस करूँ में कब तक तुझको याद करूँ
गिर्राज किशोर शर्मा
मो। 9617226588

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