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Thursday, January 3, 2013

*******विदा******

*******विदा******
विदा दे दो मुझे जिन्दगी से अब जीना मुहाल हे मेरा 
की अब परवाह करने वाला नही कोई, इस जन्हा में मेरा 

किस के लिए करू अब में खुशियों का जतन 
जिन्दगी का मकसद ही रुखसत हुआ मेरा 

जीना मुहाल हे मेरा,....

दुनिया कहती हे मुकद्दर की तासीर कर बन्दे,
में कहता हूँ लकीर ही ख़त्म हो गई मुकद्दर से मेरी,

और लोगो की चिंता मत कर लोगो का काम हे कहना
तू अपने इल्म से भी जिंदगी को खड़ा कर देगा

मिला हे मुझे अब मकसद जिन्दगी जीने का
की कोई तो घर बसने आ जाओ अब मेरा,

गिर्राज।किशोर।शर्मा।गगन।
मो।09617226588

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