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Saturday, October 6, 2012

पवित्र प्यार 

तेरे चरणों में सारा जीवन, मेरा है माँ आधार
ऐसा होता ऐसा होता, माँ कि ममता वाला प्यार

हर ख़ुशी हर गम का साथी हां माँ तेरा ही व्यवहार 
जन जन कि आधार शिला, माँ कि ममता वाला प्यार, 

हृदय वाणी को भी आभास करा दे, ऐसी होता है संचार 
अंधरुनी दुःख को पहचाने, माँ कि ममता वाला प्यार,

माँ की ममता वाला प्यार, माँ की ममता वाला प्यार, 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
गगन.

Tuesday, September 18, 2012

एक नजर

एक नजर हमारी और भी देख लिया करो
कुछ हमारे बारे में भी कह दिया करो
हम तुम्हारे दीदार को खुदा की इबादत मानते
कभी तुम भी अपने खुदा से,
हमारे जैसी चाहत मांग लिए करो

गिर्राज.किशोर शर्मा
>>>>>गगन.>>>>>>>
 

मौत

मौत को कोन मात दे पाया हे 
कोन झील मै से मोती ला पाया हे
करना हो तो करो कोशिस एक मुस्कान की
दुःख के सिवा आजतक कोई दे क्या पाया हे

गिर्राज.

इकरार

लबो तक आते आते बात भूल जाता हु
तुमसे कुछ कहना हे ख्याल भूल जाता हु
सामने होता हु खुद को भूल जाता हु
करना हे इकरार कैसे करू में 
हर बार यंही आकर में रुक जाता हु
जिंदगी में तुम्हे न्योछावर कर जाता हु
हर बार यही बात सामने आकर भूल जाता हु.

गिर्राज..

अहसास

आज तक उनका अहसास मिटा नही हे
उनसे खास कुछ भी मिला नही हे
हमारे दिल का एक हिस्सा आज भी उनका हे
उस हिस्से को आज भी हमने छुआ नही हे 

गिर्राज..किशोर..शर्मा.
श्योपुर./...

शरारते

कुछ बाते आज भी छुपा रखी हे हमने
कुछ शरारते आज भी सजा रखी हे हमने
कभी आती हे आपकी याद हमें तो.
तो उन बातो का भी संसार सजा रखा हे हमने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर/

घड़ी घडी

घड़ी घडी आवे थारी याद मने, काई कउ तोसे मारा यार घने 
कामी तू सतावे मने यार सने, प्यार करू तोसे नरो बार हने 
एक बात कउ तोसे सुन ले रे, अस्यो न होवे जज्बात हने 
नजरो का तीर चलावे घने, थोड़ो मारा बारा में भी सोच जने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर.

वक्त

कुछ दोस्त कमीने निकले कुछ वक्त खराब था
मैं उन दिनों वरना सौ फीसदी कामयाब था 

कब सोचा था नागफनी मेरे आंगन में उगे 
मेरी सोच में बचपन से महकता गुलाब था 

हां साज़िसों के आगे बेबस थी मेरी तकदीर 
बेईमानों के झुण्ड में मैं अकेला जनाब था 

मेरे साथ यारों को हिस्से का आसमां मिले 
यही तो जुर्म था मेरा बस यही इक ख्वाब था

चलेगी साँस जब तलक ना भूलूंगा वो मंजर
मेरी बर्बादी का हर एक कदम लाजवाब था

नही मालूम क्यूं हो गया था सफर बनवास
मेरे पास मेरी मेहनत का पूरा हिसाब था

अब तू मिल गया है मुझे फिर बना लूँगा महल
पूछा तो खंडहरों का गगन यही जवाब था —





मोहब्बत

डूब जाता हु में तेरी याद में इस तरह 
घनघोर बादलो में छिपा हे पानी जिस तरह
मोहब्बत किसी कि गुलाम नही सिरफिरे 
वो आती केवल खुदा-ए-रहमत कि तरह

गिर्राज..शर्मा.गगन.

अँधेरा

दूर तक घना अँधेरा हे, जाने किधर सवेरा हे
कब तक चलता जाऊ में, कितना मुस्किल झमेला हे

आज में ठहर गया...

आज में ठहर गया...

कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया
कुछ बात सुनते सुनते आज में ठहर गया

मन में एक बात याद आई उसे सुन दहल गया
कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया

फिर किसी कि याद ने मुझे बड़ा उलझा दिया 
कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया 

वादा था कुछ दिन बाद मिलेंगे हम फिर 
उस बात को फिर सुन आज में ठहर गया 

रात बड़ी गंभीर हुई दिन फिर खामोश हुआ
पर उसकी बात में पूरे दिन उलझा रहा 

कुछ दूर चलते चलते आज में ठहर गया 
कुछ बात सुनते सुनते आज में ठहर गया 

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन..
श्योपुर जिला श्योपुर
मो.9617226588

कल कल बहता जाये पानी

कल कल बहता जाये पानी

रोको इसको देगा जीवन, कल कल बहता जाये पानी
पछताओगे सहेजो इसको, कल कल बहता जाये पानी

प्रथ्वी का अस्तित्व बचेगा, रोको जनता वर्षा पानी 
फिर रोएगी जनता सारी, कल कल बहता जाये पानी.

पर्यावरण का घटता स्तर, कैसे फिर आयेगा पानी.
उठ जाओ वरना सो जाओगे, कल कल बहता जाये पानी.

कैसे कैसे खेल कैलता, देखो ये बहता पानी.
रोको इसको जल्दी रोको, कल कल बहता जाये पानी..

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन..
मो.9617226588

चलो कंही दूर चले

चलो कंही दूर चले 

दुनिया कि नजरो से हटकर चलो हम कंही दूर चले
इन गैरत लोगो से बचकर चलो हम कंही दूर चले 

मुफलिसी कि दुनिया में अब कोई अपना न रहा
जिससे कोई दर्द बांटे ऐसा कोई बंदा न रहा

कहते हे हमारी करते बड़ी परवाह ये 
पर आज क्यों हमारे खिलाफ हे ये

किसी को दोष देना अब ठीक नही लगता
चलो सनम हम अपने सपनो में चले

चलो कंही दूर चले, चलो कंही दूर चले

गिर्राज..किशोर..शर्मा..गगन.
मो.9617226588
नजर न कर बन्दे मंजिल खुद ब खुद मिलेगी 
चलता जा अपने पथ पर, तुझे सदबूधि मिलेगी.
गिर्राज.गगन.

कवंर सा..सुणो तो सरी....

सभी का प्यार और आशीर्वाद चाहूँगा..

कवंर सा..सुणो तो सरी....
कतनी थांकी हारी भंरा, कुवंर सा..म्हाकी सुणो तो सरी 
दन बुड गयो अब तो, कुवंर सा.म्हाकी सुणो तो सरी

कतनी थांकी हारी भंरा, बात म्हालोगा की सुणो तो सरी
जान काड ली थाने म्हासब्डा की, पटेल सा म्हाकी सुणो तो सरी..

रतजगा में रात काट ली, कुवंर सा सुणो तो सरी
जिंदगी भर कि बात छांट ली, कुवंर सा सुणो तो सरी

बेटी म्हाकी थारे सागे, ध्यान राख जो उको तो 
प्यार पोटली थांके लारे, उने सागे राखो तो

कुटुंब कबीलों थान्को बड़ेलो, बात ध्यान में राखेजो,
अर प्यार सु थान्को घर म्ह्केलो, इने सागे धर्रो तो 

इब तो थाने म्हाकी सुण ली, कुछ पल्ले पड्ग्यो हो.
अब कोई बात कोनी न, बात थांकी कुवंर सा राख ली हो.

गिर्राज..किशोर.शर्मा.गगन..
श्योपुर, मो.9617226588

उदास


क्यों में उदास हूँ

सब कुछ है पास मेरे फिर में उदास हूँ
नही कोई तकलीफ, फिर भी परेसान हूँ

जिंदगी के रस्ते, कितने कठिन है
चल रहा हूँ फिर भी रस्ते उदास हे

शक हे न कोई गिला, फिर परेशान हूँ
कोन बताएगा मुझे क्यों में उदास हूँ

मौत का नही है खोफ, फिर क्यों घबरा रहा.
किस किस को बताऊ क्यों में उदास हूँ,

क्यों में उदास हूँ , क्यों में उदास हूँ.

गिर्राज.किशोर.शर्मा..,,**गगन.**

भूल भुलैया

जिंदगी बनी भूल भुलैया 
कैसे वो दिन कटे, कैसे कटी राते
जाने कैसे घर पहुचे, टकराते टकराते

रात चांदनी, सुहानी लगे, दिन लगे गंभीर, 
कैसे कैसे दिन कटे, ये बड़ा व्याधीर

मदहोश से रहने लगे अब तो हम भी यारो 
किस किस से छुपाये अपने गम को प्यारो

पीड़ा कुछ अपनी लगे, करे चेन सी बात
हो जाये कुछ बात तो फिर कैसे पहुचें अघात 

गिर्राज.किशोर शर्मा ,,**गगन.**

मासूमियत

खुदा ने तुझे जो मासूमियत अता की है 
तेरे नही मेरे अहसानों कि दुआ दी है

तू होश में रहना ए मेरे सनम 
तेरी जिंदगी को मेने अपनी जिंदगी दी है

कितना ही मुश्किल भरा हो सफ़र 
हर सफ़र में तेरा हमसफ़र बनूँगा 

गिर्राज.किशोर. शर्मा. गगन.

अलग थलग पड़ा हूँ मै

अलग थलग पड़ा हूँ मै

आज अलग थलग पड़ा हूँ में, जाने किससे तलब हो रहा हूँ में
किस बेचेनी ने घेर लिया, किन राहों पर अलख रहा हूँ में,

आज बहुत अलग थलग पड़ा हूँ में,

कोई अपना नजर नही आता, दूर तक राहें सुनसान है
कोन समझेगा मेरी पीड़ा, कैसे फर्श पर पड़ा हूँ में,

आज बहुत अलग थलग पड़ा हूँ में

भीड़ में भी तनहाइयो ने घेर लिया, ये कैसे मंजर में पड़ा हूँ में
किस किस से प्यार बांटू में, ये कितना गलत पड़ा हूँ में,

कितना अलग थलग पड़ा हूँ में,कितना अगल थलग पड़ा हूँ में,

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
गगन.

सफ़र

घर हुआ बड़ा मुश्किल , 
मुश्किल जिंदगी का सफ़र
किस राह जाऊं चुनना बड़ा मुश्किल,
हर एक को मेने दिया सहारा मुस्किलो में,
मेरी मुश्किलों में सब हो गये क्यों इतने बुस्दिल, 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.गगन.

Sunday, September 16, 2012


Zindgi

कसोटी, जिंदगी कि

मै जी रहा हूँ. पर क्या सही जी रहा हूँ, 
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ.

हर दिन एक नई परीक्षा, लेती ये जिंदगी
किस दिन पता चले, पास हुआ या फ़ैल 

बाजार मै होता है, कई मुश्किलों से सामना 
क्या पता कोन जाने, दुखो को निवारणा,

मै जी रहा हूँ पर क्या सही जी रहा हूँ,
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ,

गिर्राज,गगन/

Thursday, June 14, 2012

नेताओ की जेब में बेठे ठेकेदार
चुनाव जितने के लिए करते हे तैयार 
यारो रहना सम्हल कर करना अब वार 
लोकतंत्र का राज अब करना हे तैयार 

गिर्राज..शर्मा.गगन.
जान अगर जान हमारी तुम न होती 
क्या पता क्या हमारी शक्शियत न होती 
अपनी ही जिंदगी के हम न राही होते
किसी और के दिल की बात हम कर रहे होते..
आपकी तो बात ही कुछ अलग हे जाने मन
क्या पता कल हमारे साथ ये बात होती न होती

गिर्राज..किशोर..शर्मा..
>>>>>>>>>गगन.>>>>>>
एक नजर हमारी और भी देख लिया करो
कुछ हमारे बारे में भी कह दिया करो 
हम तुम्हारे दीदार को खुदा की इबादत मानते
कभी तुम भी अपने खुदा से,
हमारे जैसी चाहत मांग लिए करो 

गिर्राज.किशोर शर्मा
>>>>>गगन.>>>>>>> —
मौत को कोन मात दे पाया हे 
कोन झील मै से मोती ला पाया हे
करना हो तो करो कोशिस एक मुस्कान की
दुःख के सिवा आजतक कोई दे क्या पाया हे

गिर्राज.
लबो तक आते आते बात भूल जाता हु
तुमसे कुछ कहना हे ख्याल भूल जाता हु
सामने होता हु खुद को भूल जाता हु
करना हे इकरार कैसे करू में 
हर बार यंही आकर में रुक जाता हु
जिंदगी में तुम्हे न्योछावर कर जाता हु
हर बार यही बात सामने आकर भूल जाता हु.

गिर्राज..
आज तक उनका अहसास मिटा नही हे
उनसे खास कुछ भी मिला नही हे
हमारे दिल का एक हिस्सा आज भी उनका हे
उस हिस्से को आज भी हमने छुआ नही हे 

गिर्राज..किशोर..शर्मा.
श्योपुर./...
कुछ बाते आज भी छुपा रखी हे हमने
कुछ शरारते आज भी सजा रखी हे हमने
कभी आती हे आपकी याद हमें तो.
तो उन बातो का भी संसार सजा रखा हे हमने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर/

Meri Kriti

घड़ी घडी आवे थारी याद मने, काई कउ तोसे मारा यार घने 
कामी तू सतावे मने यार सने, प्यार करू तोसे नरो बार हने 
एक बात कउ तोसे सुन ले रे, अस्यो न होवे जज्बात हने 
नजरो का तीर चलावे घने, थोड़ो मारा बारा में भी सोच जने 

गिर्राज.किशोर.शर्मा.
श्योपुर.

Wednesday, June 6, 2012

तुम्हारा क्या गया जो तुम रोते हो 
तुम क्या रोटी साथ लाये थे, क्या ये मकान साथ लाये थे
क्या साथ लाये थे जो चला गया जो मिला यही से मिला
जो दिया यही पर दिया, 
भगवन की भक्ति मै राम जाओ बड़ी बचे दिन भी सुधर जायेंगे वर्रना ये 
दिन भी रोने मै जायेंगे

आपका हृदय पुंज
आपकी अंतरात्मा 
आपका मस्तक चिंतन
"दोस्तों के शहर में...."
कुछ इस तरह ,खुद को सजा दी हमने।
दोस्तों के शहर में "अजनबी" बनकर जिया हमने।
मुस्कराते रहे लब ,अश्कों को पिया हमने ।
तन्हा ही यह सफ़र तय किया हमने ।
दिल मै ऐसा जस्बा रखो 
कदमो मै रास्ता रखो 
आसाँ हो हर मंजिल आपकी 
कुछ ऐसा दिल मै अरमाँ रखो 

गिर्राज किशोर शर्मा 
मो.09617226588
उस नजरबंद इन्सान ने इश्वर से पूछा
की तुम मुझे अकेला क्यों नही छोड़ते 

तो इश्वर कहते हे तू मेरी भक्ति को शक्ति मानता हे 
और मै तेरी भक्ति को अपनी शक्ति मानता हू 

श्री राधेश्याम
माँ .....!
जब तू पैदा Huwa कितना मजबूर
था
ये जहान तेरी Sonch से भी बेदर्द
था ...
हाथ Paaon भी टैब तेरे Apney
ना Thay
तेरी अंखों में दुनिया के
Sapney ना Thay ...
तुझ को आता सिर्फ रोना ही था
दूध Pi के Kaam तेरा सोना हाय
था ...
तुझ को Chalna Sikhaya था मां
फंट तेरी
तुझ को दिल में Basaya था मां
फंट तेरी ...
मां के Saaye में Parwaan.
Chadne लगा
वक्त के साथ QAD तेरा Badne
लगा ...
Dhirey Dhirey तू Kadiyal जवान हो
गया
तुझ पे सारा जहाँ Meharban हो
गया.
जोर - ए - Bazoo पे तू बात करने
लगा
Khud हाय Sajney लगा Khud
Sanwarney लगा ...
एक दिन एक लड़की तुझे Bhaa Gayei
प्रतिबंध के दुल्हन वो तेरे घर
Agayei ...
अब Faraayez से तू दरवाजा Honay
लगा
बीज नफरत का Khud हाय तू बोनी
लगा ...
फिर तू मां बाप को भी
Bhulaaney लगा
तीर बैटन के फिर तू Chalaney
लगा ...
बात बात Unn से तू Ladney
लगा
Qayda एक नया तू फिर PaDnay
लगा ...
याद कर तुझ से मां ने कह एक
शोर
एबीबी Humara गुज़ारा नहीं तेरे
बिन ...
सनई के ये बात तू Tayesh में
Agaya
तेरा गुस्सा तेरी Aqal को खा गया ...
जोश में Aake तू ने ये मां से
कह
मुख्य था खामोश सब Dekhta हाय
राहा ...
आज Kehta हूं Peecha मेरा चोर
करना
जो है रिश्ता मेरा, तुम से वो
टॉड क्या ...
जाओ जा के कहीं Kaam Dhanda करो
मरते हैं तुम भी कहीं जा प्रवेश करें
मारो ...
चारा कर Aahen भारती थी मां रात
भर
Inki Aahon का तुझ पर Howa ना
असर ...
एक दिन बाप तेरा चला Rooth कार
कैसे Bikhri थी फिर तेरी मां टूट
कर ...
फिर वो भी बस कल को Bhulati
राही
जिंदगी Isko हर रोज़ Satati राही ...
एक दिन मौत को भी Taras Agaya
Iska रोना भी तक़दीर को BHA
गया.
Ashk अंखों मुख्य Thay वो
Rawana Huwi
मौत की एक Hichki बहाना Huwi ...
एक Sukoon हमें के चेहरे पे
Chaaney लगा
फिर तू Mayyat को उसकी Sajaney,
लगा ...
Muddatain हो गई आज Booddha
हैं तू
Tooti Khatiya पे पाडा बोरा हैं
तू ...
तेरे Bacche भी एबीबी तुझ से
Dartey नहीं
Nafraten हैं, वो मुहब्बत
Kartey नहीं ...
दर्द में तू Pukare हे के "मेरी
मां "
तेरे बांध एसई HI दोनों रोशन
जहाँ ...
वक्त चलता Rahta हैं वक्त Rukta,
नहीं
हार्न जाता है वो जो के झुकता
नहीं ...
Bann के इबरत का तू एबीबी Nishaan
रह गया
Dhoondh अब जोर तेरा कहाँ रह
गया.
तू AHKAAM ई रब्बी Bhulata राहा
अपने मान - बाप को टीयू SATATA
राहा ...
Kaat ले तू वही, तू ने बोया था
जो
तुझ को कैसे Miley तू ने खोया
था जो ...
याद कर के गया दौर, तू परनाला
लगा
कल जो तू ने किया आज फिर सान
लगा ...
मौत माँगे तुझे मौत आती
नहीं
मां की सूरत Nigahon से जाति नहीं ...
तू जो Khanse तू औलाद Daantey,
तुझे
तू हैं नासूर सुख कौन Baantey
तुझे ...
मौत Ayegi तुझ को मगर वक्त
सममूल्य
Bann हाय जाये सैनिक Qabar तेरी वक्त
संसद ...
QADAR माँ बाप की GAR कोई जान
ले
अपनी जन्नत को दुनिया मुख्य
पहचान ले ...
और Leyta रहे वो बदायूं की
दुआ
उसी के दोनों जहाँ, उसका Haami
खुदा ...
याद रखना उसके aulaad बात
को
भूल जना ना रहमत की बरसात
क्या कमी थी मेरी बंदगी में, जो तुने मुझे तनहा कर दिया
एक साथ की तलाश में तुने मुझे, बेपरवाह बना दिया
क्या करता में जो तुने मुझे अकेला छोड़ दिया,
पर अकेले में भी तुने मुझे अपने सपनो से जोड़ दिया .
एक नजर हमारी और भी देख लिया करो
कुछ हमारे बारे में भी कह दिया करो 
हम तुम्हारे दीदार को खुदा की इबादत मानते
कभी तुम भी अपने खुदा से,
हमारे जैसी चाहत मांग लिए करो 

गिर्राज.किशोर शर्मा
>>>>>गगन.>>>>>>> —
जान अगर जान हमारी तुम न होती 
क्या पता क्या हमारी शक्शियत न होती 
अपनी ही जिंदगी के हम न राही होते
किसी और के दिल की बात हम कर रहे होते..
आपकी तो बात ही कुछ अलग हे जाने मन
क्या पता कल हमारे साथ ये बात होती न होती

गिर्राज..किशोर..शर्मा..
>>>>>>>>>गगन.>>>>>>
मौत को कोन मात दे पाया हे 
कोन झील मै से मोती ला पाया हे
करना हो तो करो कोशिस एक मुस्कान की
दुःख के सिवा आजतक कोई दे क्या पाया हे

गिर्राज.

Sunday, April 22, 2012

छुप छुप के मै रोता हू, छुप छुप के गम मै सहता हू
हर बार अपनों से धोका खाकर, उनके साथ मै हँसता रहता हू
सामने धोका खाता हू सामने जुल्म को सहता हू 
यारो मै अब बहुत थक गया हू जुल्म सहा नही जाता हे 
कोई तो कहे चलो अब बहुत हुआ सुख का स्वाद चखाता हू.

गिर्राज.
मुझे जिंदगी से मिला क्या ये मुझे भी पता नही
मुझे जिंदगी से गिला क्या ये भी मुझे पता नही
जिंदगी का इसमें क्या कसूर हे यारो 
लोग जिंदगी को ही जिंदगी नही देते क्यों इसका भी मुझे पता नही

गिर्राज.

Tuesday, April 3, 2012

जीवन तो हमें अपनों से मिला हे गैरों से जीवन जीने की कला 
जिंदगी ख़ुशी से बीते इसलिए मांगते हे इश्वर से दुआ
जय श्री राधे

Tuesday, March 6, 2012

आने वाली हे होली जमने लगा हे रंग
तैयार हो जाओ नोजवानो पिचकारी मै भर लो रंग
पिचकारी मै भर लो रंग अब नही छोड़ेंगे भ्रस्ताचारी को
इस बार की होली मै उतारेंगे भ्रस्ताचार का रंग 

एडवांस्ड हैप्पी होली