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Sunday, September 16, 2012

Zindgi

कसोटी, जिंदगी कि

मै जी रहा हूँ. पर क्या सही जी रहा हूँ, 
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ.

हर दिन एक नई परीक्षा, लेती ये जिंदगी
किस दिन पता चले, पास हुआ या फ़ैल 

बाजार मै होता है, कई मुश्किलों से सामना 
क्या पता कोन जाने, दुखो को निवारणा,

मै जी रहा हूँ पर क्या सही जी रहा हूँ,
कोन बताएगा मुझे,
मै जिंदगी कि कसोटी पर खरा उतर रहा हूँ,

गिर्राज,गगन/

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