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Wednesday, June 6, 2012

"दोस्तों के शहर में...."
कुछ इस तरह ,खुद को सजा दी हमने।
दोस्तों के शहर में "अजनबी" बनकर जिया हमने।
मुस्कराते रहे लब ,अश्कों को पिया हमने ।
तन्हा ही यह सफ़र तय किया हमने ।

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